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श्रीरामचरितमानस · सुन्दर काण्ड

सुन्दर काण्ड दोहा 59

सुन्दर काण्ड · Sundar Kaand

मूल पाठ

सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ। जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ॥59॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

समुद्र के अत्यंत विनीत वचन सुनकर कृपालु श्री रामजी ने मुस्कुराकर कहा- हे तात! जिस प्रकार वानरों की सेना पार उतर जाए, वह उपाय बताओ॥59॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 59 सुन्दर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik