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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड श्लोक 3

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

कुन्दइन्दुदरगौरसुन्दरं अम्बिकापतिमभीष्टसिद्धिदम्‌। कारुणीककलकन्जलोचनं नौमि शंकरमनंगमोचनम्‌॥3॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कुन्द के फूल, चंद्रमा और शंख के समान सुंदर गौरवर्ण, जगज्जननी श्री पार्वतीजी के पति, वान्छित फल के देने वाले, (दुखियों पर सदा), दया करने वाले, सुंदर कमल के समान नेत्र वाले, कामदेव से छुड़ाने वाले (कल्याणकारी) श्री शंकरजी को मैं नमस्कार करता हूँ॥3॥

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श्रीरामचरितमानस श्लोक 3 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik