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तालिका

मंदिर में अन्नदान करने का शास्त्रीय विधान क्या है?

की तालिका

अन्नदान = सर्वश्रेष्ठ दान ('अन्नदानं परं दानम्')। अन्न = ब्रह्म (उपनिषद)। विधि: संकल्प → शुद्ध सात्विक भोजन → भूखे/निर्धन/मंदिर रसोई को। श्रद्धा-सम्मान से, बासी नहीं। प्रतिदिन सर्वोत्तम। भंडारा सेवा = श्रम-दान। गीता: अन्नदान न करना = 'चोरी'।

क्या करेंक्या न करें
प्रतिदिन (सर्वोत्तम — 'अतिथि देवो भव')भूखे और निर्धन को (सर्वश्रेष्ठ)
एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा — विशेषब्राह्मण/पुरोहित को
श्राद्ध पक्ष — पितर तृप्तिमंदिर की रसोई/भंडारा में
त्योहारों पर भंडाराअन्नक्षेत्र (Free Kitchen) चलाने वाली संस्थाओं को
ग्रहण काल के बाद—
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मंदिर दान

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