ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
तालिका

शिवलिंग की परिक्रमा अर्धचंद्राकार क्यों की जाती है, पूरी गोल क्यों नहीं?

की तालिका

शिवलिंग की अर्धचंद्राकार परिक्रमा इसलिए होती है क्योंकि सोमसूत्र (जलधारी) को लांघना शास्त्रों में वर्जित है। शिवलिंग से प्रवाहित जल में शिव-शक्ति की ऊर्जा होती है। बाईं ओर से आरंभ कर जलधारी तक जाएं, फिर विपरीत दिशा में लौटें — यह चंद्राकार प्रदक्षिणा कहलाती है। शिव मूर्ति की पूरी परिक्रमा हो सकती है, शिवलिंग की नहीं।

क्या करेंक्या न करें
शिवलिंग की बाईं ओर से परिक्रमा आरंभ करें।शिवलिंग पर अभिषेक का जल जिस मार्ग से बाहर निकलता है, उसे 'सोमसूत्र', 'निर्मली' या 'जलधारी' कहते हैं
जलधारी/सोमसूत्र तक पहुंचकर रुकें।शास्त्रों का स्पष्ट आदेश है: 'अर्द्ध सोमसूत्रान्तमित्यर्थः शिव प्रदक्षिणीकुर्वन् सोमसूत्रं न लंघयेत्'
वहीं से विपरीत दिशा में लौटें।अर्थात् शिवलिंग की प्रदक्षिणा सोमसूत्र तक ही करें, उसे कभी न लांघें।
दूसरी ओर से फिर जलधारी तक आएं।—
इस प्रकार चंद्राकार (अर्ध चंद्र) आकार बनता है।—
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
शिव पूजा विधि

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।