शिवलिंग की परिक्रमा अर्धचंद्राकार क्यों की जाती है, पूरी गोल क्यों नहीं?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
शिवलिंग की अर्धचंद्राकार परिक्रमा इसलिए होती है क्योंकि सोमसूत्र (जलधारी) को लांघना शास्त्रों में वर्जित है। शिवलिंग से प्रवाहित जल में शिव-शक्ति की ऊर्जा होती है। बाईं ओर से आरंभ कर जलधारी तक जाएं, फिर विपरीत दिशा में लौटें — यह चंद्राकार प्रदक्षिणा कहलाती है। शिव मूर्ति की पूरी परिक्रमा हो सकती है, शिवलिंग की नहीं।
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शिव पूजा विधि
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