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15 फरवरी 2026

15 फरवरी 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

15 फरवरी 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
योग
व्यतीपात
करण
वणिज
वार
रविवार
हिन्दू मास
फाल्गुन
ऋतु
शिशिर
सूर्योदय
07:00
सूर्यास्त
18:11

आज के पर्व

शिवरात्रि

15 फरवरी 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

रुद्राभिषेक कराने का सबसे उत्तम दिन कौन सा होता है?

सर्वोत्तम: सावन का सोमवार और महाशिवरात्रि। फिर: सोम प्रदोष (सोमवार + त्रयोदशी) > मासिक शिवरात्रि > प्रत्येक सोमवार। किसी भी दिन किया जा सकता है, पर ऊपर बताए गए अवसर विशेष फलदायी।

शिवलिंग पर रात को पूजा करना शुभ है या अशुभ?

रात्रि पूजा अत्यंत शुभ। महाशिवरात्रि: चार प्रहर रात्रि पूजा सर्वश्रेष्ठ (शिव पुराण)। प्रदोष काल (संध्या): शिव पूजा का श्रेष्ठ समय (स्कन्द पुराण)। शिव = महाकाल, समय से परे। प्रातःकाल नियमित पूजा, रात्रि विशेष अवसरों पर — दोनों शुभ।

शिवरात्रि की रात जागरण का शास्त्रीय कारण क्या है?

शिव पुराण: इसी रात ज्योतिर्लिंग प्रकट + शिव-पार्वती विवाह। चार प्रहर अभिषेक केवल रात्रि में संभव। शिव = निशाचर, रात्रि ऊर्जा सर्वाधिक। इन्द्रियां अंतर्मुख → साधना अनुकूल। शिकारी कथा: अनजाने जागरण से भी मोक्ष।

रविवार को नमक क्यों नहीं देना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्य का दिन है और नमक सूर्य से जुड़ा है। रविवार को नमक देने से सूर्य कमजोर होता है — आत्मविश्वास में कमी और बरकत जाने की मान्यता है। यह लोक-मान्यता आधारित है।

शिव की पूजा में चतुर्दशी तिथि का क्या विशेष महत्व है?

चतुर्दशी = शिवरात्रि — शिव पूजा की सर्वश्रेष्ठ तिथि। शिव पुराण: इसी रात्रि ज्योतिर्लिंग प्रकट। चंद्र कला न्यूनतम = शिव शक्ति अधिकतम। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी प्रत्येक मास = मासिक शिवरात्रि। महाशिवरात्रि सर्वोपरि।

त्रयोदशी श्राद्ध में गया का क्या महत्व है?

यह गया श्राद्ध जैसा फल देता है।

त्रयोदशी श्राद्ध से पितर कब तक तृप्त रहते हैं?

अनन्त काल तक तृप्ति बताई गई है।

महालय में पुत्रवता निषेध लागू होता है क्या?

नहीं, महालय में लागू नहीं।

पुत्रवान के लिए त्रयोदशी श्राद्ध कब वर्जित है?

सामान्य काम्य श्राद्ध में।

पुत्रवता निषेध क्या है?

पुत्रवान के सामान्य काम्य श्राद्ध का निषेध।

त्रयोदशी श्राद्ध में पंचबलि क्या है?

पांच अंशों को अन्न अर्पण।

त्रयोदशी श्राद्ध में देव तर्पण कैसे करें?

पूर्वमुख होकर।

त्रयोदशी श्राद्ध में उपवास क्यों?

शुद्धता और संयम के लिए।

त्रयोदशी श्राद्ध शाम को कर सकते हैं क्या?

नहीं, शाम को श्राद्ध वर्जित है।

त्रयोदशी श्राद्ध सुबह कर सकते हैं क्या?

नहीं, अपराह्न काल श्रेष्ठ है।

त्रयोदशी श्राद्ध में रोहिण मुहूर्त क्या है?

कुतप के बाद का शुभ श्राद्ध काल।

त्रयोदशी श्राद्ध में कुतप मुहूर्त क्या है?

श्राद्ध का श्रेष्ठ पितृ काल।

त्रयोदशी श्राद्ध में योगी को भोजन कराने का फल क्या है?

हजार ब्राह्मण भोजन से भी श्रेष्ठ।

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पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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