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अर्थ

गीता का अर्थ(2)

गीता का अर्थगीता क्या है?गीता का महत्व
सरल उत्तर

गीता 4.7-8 — जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान प्रकट होते हैं — सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म स्थापना के लिए — प्रत्येक युग में। यह अवतारवाद का मूल सिद्धांत और शाश्वत आश्वासन है।

स्रोत प्रश्न: यदा यदा हि धर्मस्य श्लोक का अर्थ क्या है →
हिंदू दर्शन

यदा यदा हि धर्मस्य श्लोक का अर्थ क्या है

गीता 4.7-8 — जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान प्रकट होते हैं — सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म स्थापना के लिए — प्रत्येक युग में। यह अवतारवाद का मूल सिद्धांत और शाश्वत आश्वासन है।

#गीता#श्लोक#अवतार
हिंदू दर्शन

वासांसि जीर्णानि श्लोक का अर्थ क्या है

गीता 2.22 — जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र बदलकर नए पहनता है, वैसे ही आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नया धारण करती है। तात्पर्य: मृत्यु = वस्त्र बदलना; शरीर नाशवान, आत्मा शाश्वत। मृत्यु का भय अज्ञानता है।

#गीता#वासांसि जीर्णानि#आत्मा
और अर्थ
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