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अर्थ

वेद का अर्थ(3)

वेद का अर्थवेद क्या है?वेद का महत्व
सरल उत्तर

वेदों में धर्म का मूल रूप 'ऋत' है — ब्रह्मांडीय सत्य-व्यवस्था जिसे वरुण देव संरक्षित करते हैं। 'धारयति इति धर्मः' — जो धारण करे, वह धर्म। मनुस्मृति (2/6) — 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।

स्रोत प्रश्न: वेदों में धर्म का अर्थ क्या है? →
लोक

यज्ञवराह का अर्थ क्या है?

यज्ञ और वेद का मूर्त वराह रूप।

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वेद ज्ञान

वेदों में धर्म का अर्थ क्या है?

वेदों में धर्म का मूल रूप 'ऋत' है — ब्रह्मांडीय सत्य-व्यवस्था जिसे वरुण देव संरक्षित करते हैं। 'धारयति इति धर्मः' — जो धारण करे, वह धर्म। मनुस्मृति (2/6) — 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।

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सनातन दर्शन

सनातन धर्म का अर्थ क्या है?

'सनातन' = अनादि-अनंत शाश्वत। 'धर्म' = धारण करने वाला सार्वभौमिक नियम। सनातन धर्म किसी एक व्यक्ति-काल-देश तक सीमित नहीं — यह वेदों में निहित शाश्वत सत्य और जीवन-पद्धति है।

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और अर्थ
अन्य शब्दों के अर्थ

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के अर्थ।

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