विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म दो शब्दों से बना है — 'सनातन' और 'धर्म'।
सनातन' का अर्थ — संस्कृत में 'सनातन' का अर्थ है — शाश्वत, अनादि-अनंत, जिसका आदि भी न हो और अंत भी न हो। जो काल की सीमाओं से परे हो, जो सृष्टि के पूर्व भी था, सृष्टि के दौरान भी है और प्रलय के बाद भी रहेगा — वही सनातन है। यह शब्द किसी भी मानव-निर्मित धर्म या व्यक्ति विशेष से जुड़ा नहीं है।
धर्म' का अर्थ — 'धर्म' शब्द 'धृ' धातु से बना है जिसका अर्थ है — धारण करना। 'धारणाद् धर्मः' — जो समाज, सृष्टि और जीवन को धारण करता है वही धर्म है। यह 'religion' से भिन्न अर्थ का शब्द है — धर्म सार्वभौमिक नियम है।
सनातन धर्म का अर्थ — शास्त्रीय व्याख्या के अनुसार, 'सनातन धर्म' का अभिप्राय है वह शाश्वत सत्य और जीवन-पद्धति जो किसी एक व्यक्ति, देश या काल तक सीमित नहीं है। यह किसी एक संस्थापक का धर्म नहीं — यह परमात्मा द्वारा प्रेरित, ऋषियों द्वारा अनुभूत और वेदों में निहित ज्ञान है।
विश्व का सबसे प्राचीन धर्म — सनातन धर्म विश्व का सबसे पुराना धर्म माना जाता है। इसके वेद-ग्रंथ मानव सभ्यता के प्रारंभिक ज्ञान का भंडार हैं।
सनातन धर्म की विशेषताएँ:
- ▸यह किसी एक पूजा पद्धति, मंत्र या कर्मकांड तक सीमित नहीं।
- ▸इसमें अनेक सम्प्रदाय, दर्शन और उपासना पद्धतियाँ सह-अस्तित्व में हैं।
- ▸'एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति' — सत्य एक है, मार्ग अनेक।
- ▸यह धर्म जड़-चेतन सबके कल्याण की बात करता है।
महात्मा गांधी ने कहा था — 'मैं इसलिए सनातनी हिंदू हूँ क्योंकि मैं वेदों, उपनिषदों, पुराणों और हिंदू धर्मग्रंथों में विश्वास रखता हूँ।' यह विश्वास ही सनातन धर्म की जीवंतता है।




