श्राद्ध परिचयश्राद्ध क्या होता है?श्राद्ध = पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक अन्न, जल, पिण्ड, तर्पण अर्पण। 'श्रद्धया दीयते यस्मात् तत् श्राद्धम्'। तीन ऋणों (देव, ऋषि, पितृ) में से पितृ ऋण से मुक्ति का एकमात्र शास्त्र-सम्मत मार्ग। सनातन धर्म का सबसे पवित्र अनुष्ठान।#श्राद्ध#परिभाषा#अर्थ
जीवन एवं मृत्युशाल्मली नरक क्या है?शाल्मली नरक = 'काँटेदार शाल्मली वृक्ष वाला नरक'। 5 योजन फैला, 1 योजन ऊँचा विशाल वृक्ष। पापियों को उल्टा लटकाकर साँकलों से बाँधकर पीटा जाता है। 21 प्रमुख नरकों में वर्णित।#शाल्मली नरक#परिभाषा#शाल्मली वृक्ष
जीवन एवं मृत्युशूकरमुख नरक क्या है?शूकरमुख = 'सूअर के मुख वाला नरक'। असंख्य सूअर पापियों को नोचते हैं। 'स्त्री का अपमान करने वालों को सूअर नोचते हैं।' — गरुड़ पुराण का वचन।#शूकरमुख नरक#परिभाषा#सूअर
जीवन एवं मृत्युअसिपत्रवन नरक क्या है?असिपत्रवन = 'तलवार जैसे पत्तों वाला वन'। 2000 योजन विस्तार। पेड़ों पर पत्तों की जगह तीखी तलवारें। दावाग्नि और भयावह पक्षियों से व्याप्त। गरुड़ पुराण अध्याय 2 व 4 में वर्णित।#असिपत्रवन नरक#परिभाषा#तलवार पत्ते
जीवन एवं मृत्युकालसूत्र नरक क्या है?कालसूत्र = 'काल के धागे का नरक'। 21 प्रमुख नरकों में से एक। 'समय बर्बाद करने वालों को आग पर चलाया जाता है।' कालसूत्र से बाँधकर यातना — भागना असंभव।#कालसूत्र नरक#परिभाषा#समय
जीवन एवं मृत्युअंध तामिस्र नरक क्या है?अंधतामिस्र = 'परम अंधकार'। जौंकें रक्त चूसती हैं। माता-पिता-मित्र की हत्या करने वाले और परिवार से विश्वासघात करने वाले यहाँ जाते हैं। तामिस्र से भी अधिक भयंकर।#अंधतामिस्र नरक#परिभाषा#परम अंधकार
जीवन एवं मृत्युतामिस्र नरक क्या है?तामिस्र = 'घना अंधकार'। 21 प्रमुख नरकों में प्रथम। अंधकारमय गुफा, लोहे की पट्टियों-मुग्दरों से पिटाई। चोरों और धोखेबाजों के लिए यह नरक है।#तामिस्र नरक#परिभाषा#अंधकार
जीवन एवं मृत्युमहा रौरव नरक क्या है?महारौरव = रौरव से भी अधिक भयंकर नरक। 21 प्रमुख नरकों में सम्मिलित। 'निर्दोष प्राणियों की हत्या करने वालों के लिए।' रुरु सर्पों की अधिक संख्या और तीव्र विष।#महारौरव नरक#परिभाषा#नरक
जीवन एवं मृत्युरौरव नरक क्या है?रौरव = 'रुरु सर्प' या 'चीत्कार' से बना नाम। 21 प्रमुख नरकों में से एक। विशाल अग्निकुंड, जलती भूमि, लोहे के जलते तीरों से बींधना, ईख की तरह पेरना — यह रौरव नरक का स्वरूप है।#रौरव नरक#परिभाषा#नरक
जीवन एवं मृत्युकुंभिपाक नरक क्या है?कुंभीपाक = 'कड़ाही में पकाने का नरक'। खौलते तेल या जलती रेत में आत्मा को पकाया जाता है। ब्रह्महत्यारे, हिंसक और संपत्ति हड़पने वाले यहाँ जाते हैं। गरुड़ पुराण के सर्वाधिक भयंकर नरकों में।#कुंभिपाक#नरक#परिभाषा
जीवन एवं मृत्युमहापापी किसे कहा जाता है?महापापी = पंच महापापों का कर्ता (ब्रह्महत्यारा, सुरापान, स्वर्ण-चोरी, गुरुपत्नीगमन, महापातकी-संसर्ग)। गरुड़ पुराण में — 'मित्रद्रोही, कृतघ्न, ब्रह्महत्यारा — ये महापापी हैं।'#महापापी#परिभाषा#पंच महापाप
जीवन एवं मृत्युमहापाप क्या है?महापाप = अत्यंत जघन्य कर्म। पंच महापाप — ब्रह्महत्या, सुरापान, स्वर्ण-चोरी, गुरुपत्नी-गमन, महापापी-संसर्ग। गोहत्या भी महापाप। 'ब्रह्महत्या सबसे बड़ा पाप' — गरुड़ पुराण का वचन। भूमिदान से प्रायश्चित।#महापाप#परिभाषा#पंच महापाप
जीवन एवं मृत्युपाप क्या है?पाप = धर्म के विरुद्ध, दूसरों को कष्ट देने वाला और स्वयं को अधःपतन की ओर ले जाने वाला कर्म। तीन प्रकार — मानसिक, वाचिक, कायिक। गरुड़ पुराण अध्याय 4 में पाप-कर्मों का विस्तृत वर्णन है।#पाप#परिभाषा#धर्म
जीवन एवं मृत्युनरक क्या है?नरक = पाप का फल भोगने का स्थान। पाताल लोक में। 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि है' — गरुड़ पुराण का वचन। शाश्वत नहीं — पाप-फल समाप्त होने पर पुनर्जन्म मिलता है। 84 लाख नरकों का उल्लेख है।#नरक#परिभाषा#यमलोक
जीवन एवं मृत्युश्राद्ध क्या है?श्राद्ध = 'श्रद्धापूर्वक' किया जाने वाला कर्म। उचित काल-स्थान पर पितरों के नाम ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक अर्पित वस्तु श्राद्ध है। गरुड़ पुराण में इसे प्रेत-पितर मुक्ति का सर्वोत्तम साधन बताया गया है।#श्राद्ध#परिभाषा#पितर
जीवन एवं मृत्युदान क्या है?दान = श्रेष्ठ पात्र को, उचित समय पर, बिना स्वार्थ के देना। गरुड़ पुराण में 'वितरण' (वि+तरण) कहा गया है — देने से ही वैतरणी पार होती है। भूलोक, भुवर्लोक और देवलोक सभी दान से तृप्त होते हैं।#दान#परिभाषा#गरुड़ पुराण
शिव पूजारुद्राभिषेक क्या होता है?रुद्राभिषेक = रुद्र (शिव) + अभिषेक + वैदिक मंत्र-पाठ। मूल: तैत्तिरीय संहिता (4.5) — श्री रुद्रम् (नमकम्) + चमकम्। नमकम् = 11 अनुवाक — 108 रूपों की स्तुति। चमकम् = 346 वर-प्रार्थना। सबसे शक्तिशाली वैदिक शिव-पूजा।#रुद्राभिषेक#परिभाषा#श्री रुद्रम्
तंत्र परिचयतंत्र साधना का असली अर्थ क्या है?तंत्र का असली अर्थ: 'जिससे ज्ञान का विस्तार हो।' तंत्र = शरीर को मंदिर मानकर ब्रह्मांड की शक्ति जगाना। तंत्रालोक: शिव (चेतना) + शक्ति (ऊर्जा) की एकता का विज्ञान। काला जादू नहीं — मोक्ष का त्वरित मार्ग। 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्मांडे।'#परिचय#परिभाषा#अर्थ
बीज मंत्र परिचयबीज मंत्र क्या होता है?बीज मंत्र: एक/दो अक्षर का मंत्र जिसमें देवता की समस्त शक्ति संघनित। जैसे बीज में वृक्ष। प्रमुख: ॐ (सर्वदेव), ह्रीं (महालक्ष्मी), क्रीं (काली), ऐं (सरस्वती), श्रीं (लक्ष्मी), गं (गणेश)। बीज मंत्र स्वयंपूर्ण — पूर्ण मंत्र में जोड़ने पर अधिक शक्तिशाली।#बीज मंत्र#परिभाषा#ॐ
मंत्र जप परिचयमंत्र जप क्या होता है?जप = देवता का ध्यान करते हुए मंत्र की आवृत्ति। 'मनन त्रायते इति मंत्रः' — जो मनन से रक्षा करे। गीता 10.25: 'यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ।' तीन प्रकार: वाचिक (मुख से) < उपांशु (10x) < मानस (100x) — मानस जप सर्वश्रेष्ठ।#परिचय#परिभाषा#जप
तंत्र परिचयतंत्र और मंत्र में क्या अंतर है?मंत्र = पवित्र ध्वनि (तंत्र का एक अंग)। तंत्र = सम्पूर्ण साधना प्रणाली जिसमें मंत्र + यंत्र + क्रिया तीनों शामिल हैं। केवल 'ॐ नमः शिवाय' जपना = मंत्र साधना; शिव यंत्र + मंत्र + हवन + अभिषेक = तंत्र साधना।#तंत्र मंत्र अंतर#परिभाषा#यंत्र
ध्यान साधनाध्यान क्या होता है और इसे कैसे करें?ध्यान वह अवस्था है जिसमें चित्त बिना भटके एक विषय पर टिका रहे (योगसूत्र 3/2)। विधि — शांत स्थान, सीधा आसन, श्वास-साधना, फिर ओम्/इष्टदेव/श्वास पर एकाग्रता। गीता (6/15) के अनुसार नियमित ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है।#ध्यान#परिभाषा#विधि
सनातन दर्शनसनातन धर्म का अर्थ क्या है?'सनातन' = अनादि-अनंत शाश्वत। 'धर्म' = धारण करने वाला सार्वभौमिक नियम। सनातन धर्म किसी एक व्यक्ति-काल-देश तक सीमित नहीं — यह वेदों में निहित शाश्वत सत्य और जीवन-पद्धति है।#सनातन धर्म#अर्थ#परिभाषा