विस्तृत उत्तर
अंधतामिस्र नरक गरुड़ पुराण में वर्णित 21 प्रमुख नरकों में से एक है। यह तामिस्र से भी अधिक भयावह है।
नाम का अर्थ — 'अंध' = पूर्णतः अंधा और 'तामिस्र' = घना अंधकार। अर्थात् परम अंधकार — जहाँ देखना और सुनना असंभव है।
गरुड़ पुराण में स्थान — 'तामिस्त्र और अन्धतामिस्त्र तथा रौरवादि नरकों की जो यातनाएँ हैं...' — यह उल्लेख तीसरे अध्याय में मिलता है।
स्वरूप — 'अंधतामिस्र — इस नरक में जौंके भरी हुई हैं जो इंसान का रक्त चूसती हैं। माता, पिता और मित्र की हत्या करने वाले को इस नरक में जाना पड़ता है।'
परिवार के धोखेबाजों के लिए — 'अंधतामिस्र — अपने परिवार के सदस्यों को धोखा देने वालों के लिए।'
परम अंधकार — यहाँ इतना घना अंधकार है कि आत्मा अपना हाथ भी नहीं देख सकती। यह 'अंधापन' पाप के परिणामस्वरूप है।





