विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में 'महापाप' की श्रेणी में वे पाप आते हैं जो अत्यंत जघन्य और भयंकर कर्म-परिणाम देने वाले हैं।
पंच महापाप — सनातन शास्त्रों और गरुड़ पुराण में पाँच महापाप माने गए हैं — ब्रह्महत्या (ब्राह्मण की हत्या), सुरापान (मद्यपान), स्वर्णस्तेय (स्वर्ण-चोरी), गुरुपत्नी-गमन (गुरु की पत्नी से अनुचित संबंध), महापातकिसंसर्ग (महापापियों की संगति)।
गरुड़ पुराण में — 'मित्रद्रोही, कृतघ्न, सुरापान करने वाला, गुरुपत्नीगामी, ब्रह्महत्यारा और स्वर्ण की चोरी करने वाला — ये महापापी कहे गये हैं।'
गोहत्या — गाय को माता का दर्जा होने से गोहत्या को भी महापाप माना गया है।
महापाप का परिणाम — 'महापाप करने वाले व्यक्ति को न केवल जीवित रहते हुए कष्ट झेलने पड़ते हैं, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी यमलोक में कठोर दंड भुगतना पड़ता है।' ये पाप कई जन्मों तक प्रभावित करते हैं।
महापाप का प्रायश्चित — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'ब्रह्महत्या जैसे महापाप से मुक्ति भूमिदान से होती है।'





