विस्तृत उत्तर
शाल्मली नरक गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में 21 प्रमुख नरकों में वर्णित है। इसे 'शाल्मली वृक्ष' पर आधारित यातना के लिए जाना जाता है।
नाम का अर्थ — 'शाल्मली' = सेमल का वृक्ष जिसमें लंबे, नुकीले काँटे होते हैं। इस नरक में ऐसे ही एक विशाल वृक्ष पर पापियों को यातना दी जाती है।
गरुड़ पुराण में वर्णन — 'वहाँ जलती हुई अग्नि के समान प्रभा वाला एक विशाल वृक्ष है, जो पाँच योजन में फैला हुआ है तथा एक योजन ऊँचा है।' यह अत्यंत विशाल शाल्मली वृक्ष है।
वृक्ष की विशेषता — 'उस वृक्ष में नीचे मुख करके उसे साँकलों से बाँधकर वे दूत पीटते हैं।' पापियों को उल्टा लटकाकर पीटा जाता है।
पापियों की स्थिति — 'उसी शाल्मली वृक्ष में भूख और प्यास से पीड़ित तथा यमदूतों द्वारा पीटे जाते हुए अनेक पापी लटकते रहते हैं। वे आश्रयविहीन पापी अंजलि बाँधकर — हे यमदूतों! — पुकारते हैं।'





