विस्तृत उत्तर
असिपत्रवन नरक गरुड़ पुराण के द्वितीय और चतुर्थ अध्याय में वर्णित एक अत्यंत भयावह नरक है।
नाम का अर्थ — 'असि' = तलवार/खड्ग, 'पत्र' = पत्ता और 'वन' = जंगल। अर्थात् 'तलवार जैसे पत्तों वाला वन।'
गरुड़ पुराण में वर्णन — 'अति भयंकर महान असिपत्रवन नामक नरक में वह पहुँचता है, जो दो हजार योजन विस्तारवाला कहा गया है।' यह 2000 योजन में फैला विशाल वन है।
वन का स्वरूप — 'यह नरक एक जंगल की तरह है जिसके पेड़ों पर पत्तों की जगह तीखी तलवारें और खड्ग हैं।' इस वन में प्रवेश करते ही अंग कट जाते हैं।
वन की विशेषता — 'वह वन कौओं, उल्लुओं, वटों (पक्षी), गीधों, सरघों तथा डाँसों से व्याप्त है। उसमें चारों ओर दावाग्नि व्याप्त है।'
यमदूत — 'जब तलवार जैसे पत्तों से उसके अंग कट जाते हैं तब यमदूत उससे कहते हैं — रे पापी!'





