विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म का परिचय और दार्शनिक आधार मनुस्मृति, महाभारत के शांति पर्व और भगवद्गीता में मिलता है:
सनातन धर्म का अर्थ
सनातन' = सन (सदा) + तन (फैला हुआ) — जो सदा से है, सदा रहेगा। 'धर्म' = 'धृ' धातु — जो धारण करे, टिकाए, पोषण करे।
सनातन धर्म वह जीवन दर्शन है जो:
- ▸किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया (अपौरुषेय)
- ▸किसी एक समय या स्थान से नहीं आया
- ▸सार्वभौमिक और शाश्वत सत्यों पर आधारित है
सनातन धर्म की विशेषताएं
1वेद प्रामाण्य
सनातन धर्म में वेद सर्वोच्च प्रमाण हैं। वेद किसी एक देवता, समुदाय या काल के लिए नहीं — संपूर्ण सृष्टि के लिए हैं।
2अनेकता में एकता
> 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति।' (ऋग्वेद 1.164.46)
— सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से जानते हैं।
सनातन धर्म में अनेक देवता, अनेक मार्ग — किंतु सब एक परमात्मा की ओर।
3चार पुरुषार्थ
- 1धर्म — नैतिकता और कर्तव्य
- 2अर्थ — भौतिक समृद्धि
- 3काम — उचित इच्छाओं की पूर्ति
- 4मोक्ष — आत्मा की अंतिम मुक्ति
4चार आश्रम (जीवन के चार चरण)
- 1ब्रह्मचर्य — विद्यार्थी जीवन
- 2गृहस्थ — गृहस्थ जीवन
- 3वानप्रस्थ — सेवानिवृत्ति
- 4संन्यास — त्याग और मोक्ष
5कर्म और पुनर्जन्म
कर्म का सिद्धांत — जो बोओगे वही काटोगे। पुनर्जन्म — आत्मा नया शरीर धारण करती है जब तक मोक्ष न हो।
6सर्वधर्म समभाव
सनातन धर्म किसी अन्य मार्ग को 'गलत' नहीं कहता। महाभारत: 'धर्मो रक्षति रक्षितः' — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
सनातन धर्म के दस लक्षण (मनुस्मृति 6.92)
> 'धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिंद्रियनिग्रहः।
> धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।'
- 1धृति (धैर्य)
- 2क्षमा
- 3दम (इंद्रिय संयम)
- 4अस्तेय (चोरी न करना)
- 5शौच (शुद्धि)
- 6इंद्रिय निग्रह
- 7धी (विवेक)
- 8विद्या
- 9सत्य
- 10अक्रोध
सनातन धर्म और आधुनिकता
सनातन धर्म का दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है — 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार), 'अहिंसा परमो धर्मः' (अहिंसा सर्वोच्च धर्म) और पर्यावरण की पवित्रता — ये शाश्वत मूल्य हैं।





