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सनातन दर्शन📜 मनुस्मृति, महाभारत — शांति पर्व, भगवद्गीता, ऋग्वेद, विष्णु पुराण3 मिनट पठन

सनातन धर्म क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

सनातन धर्म शाश्वत, अपौरुषेय (किसी एक के द्वारा नहीं बनाया) जीवन दर्शन है। इसकी विशेषताएं: वेद प्रामाण्य, 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति' (सत्य एक — मार्ग अनेक), चार पुरुषार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष), कर्म-पुनर्जन्म और 'वसुधैव कुटुम्बकम्'।

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विस्तृत उत्तर

सनातन धर्म का परिचय और दार्शनिक आधार मनुस्मृति, महाभारत के शांति पर्व और भगवद्गीता में मिलता है:

सनातन धर्म का अर्थ

सनातन' = सन (सदा) + तन (फैला हुआ) — जो सदा से है, सदा रहेगा। 'धर्म' = 'धृ' धातु — जो धारण करे, टिकाए, पोषण करे।

सनातन धर्म वह जीवन दर्शन है जो:

  • किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया (अपौरुषेय)
  • किसी एक समय या स्थान से नहीं आया
  • सार्वभौमिक और शाश्वत सत्यों पर आधारित है

सनातन धर्म की विशेषताएं

1वेद प्रामाण्य

सनातन धर्म में वेद सर्वोच्च प्रमाण हैं। वेद किसी एक देवता, समुदाय या काल के लिए नहीं — संपूर्ण सृष्टि के लिए हैं।

2अनेकता में एकता

> 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति।' (ऋग्वेद 1.164.46)

— सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से जानते हैं।

सनातन धर्म में अनेक देवता, अनेक मार्ग — किंतु सब एक परमात्मा की ओर।

3चार पुरुषार्थ

  1. 1धर्म — नैतिकता और कर्तव्य
  2. 2अर्थ — भौतिक समृद्धि
  3. 3काम — उचित इच्छाओं की पूर्ति
  4. 4मोक्ष — आत्मा की अंतिम मुक्ति

4चार आश्रम (जीवन के चार चरण)

  1. 1ब्रह्मचर्य — विद्यार्थी जीवन
  2. 2गृहस्थ — गृहस्थ जीवन
  3. 3वानप्रस्थ — सेवानिवृत्ति
  4. 4संन्यास — त्याग और मोक्ष

5कर्म और पुनर्जन्म

कर्म का सिद्धांत — जो बोओगे वही काटोगे। पुनर्जन्म — आत्मा नया शरीर धारण करती है जब तक मोक्ष न हो।

6सर्वधर्म समभाव

सनातन धर्म किसी अन्य मार्ग को 'गलत' नहीं कहता। महाभारत: 'धर्मो रक्षति रक्षितः' — जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।

सनातन धर्म के दस लक्षण (मनुस्मृति 6.92)

> 'धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिंद्रियनिग्रहः।

> धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।'

  1. 1धृति (धैर्य)
  2. 2क्षमा
  3. 3दम (इंद्रिय संयम)
  4. 4अस्तेय (चोरी न करना)
  5. 5शौच (शुद्धि)
  6. 6इंद्रिय निग्रह
  7. 7धी (विवेक)
  8. 8विद्या
  9. 9सत्य
  10. 10अक्रोध

सनातन धर्म और आधुनिकता

सनातन धर्म का दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है — 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार), 'अहिंसा परमो धर्मः' (अहिंसा सर्वोच्च धर्म) और पर्यावरण की पवित्रता — ये शाश्वत मूल्य हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
मनुस्मृति, महाभारत — शांति पर्व, भगवद्गीता, ऋग्वेद, विष्णु पुराण
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