गीता 4.7-8 — जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान प्रकट होते हैं — सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म स्थापना के लिए — प्रत्येक युग में। यह अवतारवाद का मूल सिद्धांत और शाश्वत आश्वासन है।
स्रोत प्रश्न: यदा यदा हि धर्मस्य श्लोक का अर्थ क्या है →