ज्ञान योग = आत्मा-ब्रह्म के यथार्थ बोध से मोक्ष। विचारकों के लिए। स्थितप्रज्ञ अवस्था — कामना-भय-क्रोध से मुक्त। क्षेत्र (शरीर) और क्षेत्रज्ञ (आत्मा) का विवेक (अध्याय 13)। 'सर्वकर्म ज्ञान में परिसमाप्त होते हैं' (4)। समदर्शिता — सभी में ईश्वर दर्शन।
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