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त्रिगुण क्या हैं — सत्त्व, रजस, तमस?

संक्षिप्त उत्तर

सत्त्व (पवित्रता-ज्ञान), रजस (क्रिया-इच्छा) और तमस (अज्ञान-आलस्य) — ये तीन गुण प्रकृति की मूल प्रवृत्तियाँ हैं जो हर जीव के स्वभाव और कर्म को प्रभावित करती हैं।

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विस्तृत उत्तर

त्रिगुण सनातन दर्शन का वह मूलभूत सिद्धांत है जो बताता है कि प्रकृति और उससे बनी हर वस्तु — चाहे जड़ हो या चेतन — तीन गुणों के संयोग से बनी है। भगवद्गीता के अध्याय 14 में श्रीकृष्ण ने इनका विस्तृत वर्णन किया है।

सत्त्व गुण — यह गुण पवित्रता, प्रकाश और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। जब सत्त्व प्रबल होता है, तो मनुष्य में शांति, स्पष्टता, करुणा, सत्य और ज्ञान की प्रवृत्ति बढ़ती है। गीता में कहा गया है कि सात्त्विक व्यक्ति की मृत्यु के बाद उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है।

रजस गुण — यह गुण क्रिया, इच्छा, आसक्ति और महत्त्वाकांक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। राजसिक व्यक्ति क्रियाशील, स्वार्थी और कामनाओं में बंधा होता है। यह न अच्छा है न बुरा — सही दिशा में लगाया जाए तो उपयोगी, अन्यथा बंधन का कारण।

तमस गुण — यह गुण अज्ञान, आलस्य, निद्रा और प्रमाद का प्रतिनिधित्व करता है। तामसिक व्यक्ति में भ्रम, निष्क्रियता और अधर्म की प्रवृत्ति होती है।

ये तीनों गुण हर मनुष्य में कम-ज्यादा मात्रा में होते हैं और परस्पर एक-दूसरे को दबाते-उभारते रहते हैं। जीवन में जो खाएँ, जो सोचें, जो संगति करें — सब इन गुणों को प्रभावित करते हैं। मोक्ष के लिए तीनों गुणों से परे होना आवश्यक है।

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