विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि जब किसी के जीवन में बार-बार विपत्तियाँ आती हैं या पूजा का फल नहीं मिलता, तो उसके कारणों को समझना जरूरी है।
पूजा-विधि में गलतियाँ — शिव जी की पूजा में कुछ विशेष नियमों का उल्लंघन करने से उनकी अनुकम्पा में विघ्न आ सकता है। जैसे शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाना (पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी ने शिव को श्राप दिया था), शिवलिंग पर सीधे फल रखना, पूर्व दिशा में मुँह करके जल चढ़ाना — ये सब शिव-विधान के विपरीत हैं।
जीवन में संकेत — जब जीवन में बार-बार अकारण कलह हो, कार्यों में बाधाएँ लगातार बनी रहें, मन में अशांति और नकारात्मकता बढ़ती रहे, शिव-पूजा में भी मन न लगे — तब यह संकेत हो सकता है कि पूजा में कोई त्रुटि है या जीवन में आचरण-दोष है।
शास्त्रीय दृष्टि — वास्तव में शिव 'भोलेनाथ' हैं — शीघ्र प्रसन्न होने वाले। वे नाराज नहीं होते, परंतु जब हम उनकी विधि का उल्लंघन करते हैं तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। असली कारण हमारा अनाचरण होता है, ईश्वर की रुष्टता नहीं।
उपाय — नित्य सोमवार व्रत, 'ॐ नमः शिवाय' जप, बेलपत्र से शिव-पूजन और क्षमायाचना मंत्र से पुनः पूजा आरंभ करें।





