विस्तृत उत्तर
जय बजरंग बली और जय हनुमान — दोनों श्री हनुमानजी की वंदना के उद्घोष हैं, परंतु नामों का भाव अलग है।
जय हनुमान सबसे सरल और सीधा उद्घोष है। 'हनुमान' नाम का एक प्रचलित अर्थ है — जिनकी ठुड्डी (हनु) टेढ़ी हो गई थी, वज्र के प्रहार से (बालकाण्ड में वर्णित प्रसंग)। यह नाम सर्वत्र प्रचलित है और हनुमान चालीसा समेत सभी स्तोत्रों में यही नाम मुख्यतः आता है। 'जय हनुमान' में उनके सम्पूर्ण स्वरूप — भक्त, योद्धा, ज्ञानी, वायुपुत्र — सभी को एक साथ वंदन होता है।
जय बजरंग बली में दो नाम समाहित हैं। 'बजरंग' का अर्थ है वज्र के समान अंग वाले — वज्रांग का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है जिनका शरीर वज्र की तरह अभेद्य है। 'बली' का अर्थ है बलशाली। इसलिए 'बजरंग बली' विशेष रूप से उनके शक्ति-स्वरूप और अजेय पराक्रम का उद्घोष है। यह उत्तर और मध्य भारत में विशेष रूप से प्रचलित है और लोक-भक्ति में इनका नाम अधिक जोश और शौर्य के भाव से लिया जाता है।
संक्षेप में — दोनों एक ही परम भक्त और वीर की वंदना हैं। 'जय हनुमान' उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व की, जबकि 'जय बजरंग बली' विशेष रूप से उनकी अपराजेय शक्ति और वीरता की वंदना है।





