विस्तृत उत्तर
यह अनुभव सभी साधकों को होता है — कभी-कभी पूजा करते समय मन बिल्कुल नहीं लगता, सब यांत्रिक लगता है। यह स्थिति स्वाभाविक है और इसके लिए निम्नलिखित उपाय सहायक हैं:
पहला उपाय — भगवान को अपना मित्र, माता, या प्रिय मानें। नवधा भक्ति में यह बताया गया है कि भगवान से प्रेम के विभिन्न भाव होते हैं — दास्य, सख्य, वात्सल्य, माधुर्य। जो भाव आपके मन के सबसे करीब हो, उसी से भगवान को देखें।
दूसरा उपाय — भगवान की कथा पढ़ें या सुनें। रामायण, भागवत, या भगवद्गीता का एक पृष्ठ प्रतिदिन पढ़ने से स्वतः भक्ति उत्पन्न होती है। कथा सुनते-सुनते मन भगवान से जुड़ने लगता है।
तीसरा उपाय — गुनगुनाएँ या जपें। यदि मन भटक रहा हो तो एक भजन या मंत्र को धीमे स्वर में गुनगुनाना शुरू करें। 'राम-राम' या 'हरे कृष्ण' का हल्का जप मन को वापस लाता है।
चौथा उपाय — भगवान से बात करें। मन में जो भी चल रहा है — परेशानी, डर, खुशी — वह सब भगवान को बताएँ। यह सबसे सहज भक्ति है।
पाँचवाँ उपाय — पूजा-स्थान को सुंदर रखें। जब पूजाघर साफ, सुगंधित और सुसज्जित हो तो वहाँ जाते ही मन प्रसन्न हो जाता है और भक्ति स्वाभाविक रूप से जागती है।





