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चेकलिस्ट

आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किस परिस्थिति में करना चाहिए?

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वाल्मीकि रामायण युद्ध काण्ड सर्ग 105: अगस्त्य→राम (थके+चिंतित) → तीन बार जप → रावण वध। परिस्थिति: विजय/सफलता, संकट/कष्ट, निराशा/थकान, सूर्य ग्रह शांति, नेत्र/हृदय रोग। सूर्योदय, 3 बार, रविवार। बिना दीक्षा सभी। 30 श्लोक।

  1. 1परीक्षा, साक्षात्कार, प्रतियोगिता से पूर्व।
  2. 2व्यापार/नौकरी में बड़ा निर्णय।
  3. 3कोर्ट केस, विवाद, प्रतिद्वंद्विता।
  4. 4सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुख कर पाठ।
  5. 5तीन बार पाठ = मूल विधि (अगस्त्य: 'एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा')।
  6. 6रविवार विशेष।
  7. 730 श्लोक, 6 भाग।
  8. 8बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते हैं।
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