वैदिक: वेद आधारित, यज्ञ प्रधान, अग्नि केन्द्र, वैदिक ऋचाएँ। आगमिक: आगम/तंत्र आधारित, मन्दिर/मूर्ति पूजा प्रधान, विग्रह केन्द्र, बीज मंत्र/यन्त्र/न्यास। तीन प्रकार: शैव, वैष्णव, शाक्त आगम। 'कलौ आगमसम्मतः' — कलियुग में आगम विशेष उपयोगी। दोनों परस्पर पूरक।
- 1वैदिक: वेद (ऋक्, यजुः, साम, अथर्व) — अपौरुषेय (ईश्वर प्रेरित)।
- 2आगमिक: आगम/तंत्र ग्रंथ — शिव द्वारा पार्वती को दिया गया उपदेश (शैव आगम), विष्णु द्वारा (पाञ्चरात्र/वैखानस आगम), देवी द्वारा (शाक्त आगम)।
- 3वैदिक: यज्ञ/होम प्रधान। अग्नि में आहुति, वैदिक ऋचाओं का विशिष्ट स्वर में पाठ।
- 4आगमिक: मन्दिर पूजा प्रधान। देवता विग्रह में प्राण प्रतिष्ठा, दैनिक पूजा (नित्यपूजा), उत्सव पूजा। विस्तृत अनुष्ठान — अभिषेक, अलंकार, नैवेद्य, दीपाराधना।
- 5वैदिक: यज्ञकुण्ड/अग्नि केन्द्र में।
- 6आगमिक: देवालय (मन्दिर) और विग्रह (मूर्ति) केन्द्र में। मन्दिर निर्माण, शिल्प, वास्तु सब आगम से नियंत्रित।
- 7शैव आगम: शिव उपासना (पाशुपत, शैवसिद्धान्त, त्रिक/कश्मीर शैव)।
- 8वैष्णव आगम: विष्णु उपासना (पाञ्चरात्र, वैखानस)।
- 9शाक्त आगम: देवी उपासना (कौलाचार, श्रीविद्या आदि)।
- 10वैदिक: वैदिक सूक्त और मंत्र (स्वर-प्रधान)।
- 11आगमिक: बीज मंत्र, तांत्रिक मंत्र, यन्त्र, मुद्रा, न्यास — ये सब आगम की विशेषता।