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चेकलिस्ट

आत्मा शरीर के किस हिस्से से निकलती है मृत्यु समय

की चेकलिस्ट

आत्मा ब्रह्मरंध्र (सिर) से निकले → मोक्ष/उत्तम गति (गीता 8.12-13)। नेत्र → देवलोक, नासिका → अंतरिक्ष, मुख → पुनर्जन्म, गुदा → अधोगति। योगी प्राण को सुषुम्ना नाड़ी से ब्रह्मरंध्र तक ले जाते हैं। निर्गमन कर्म और साधना पर निर्भर।

  1. 1ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) — सर्वोत्तम। योगियों, ज्ञानियों और परम भक्तों की आत्मा यहां से निकलती है। गीता (8.12-13) में कहा गया है — 'सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च। मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणम्' अर्थात सभी द्वार बंद करके, प्राण को मस्तक (ब्रह्मरंध्र) में स्थापित करके जो शरीर त्यागता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।
  2. 2नेत्र (आंखें) — पुण्यात्मा, सूर्यलोक/देवलोक गति।
  3. 3नासिका (नाक) — मध्यम कर्म वाले, अंतरिक्ष/वायुलोक।
  4. 4मुख — सामान्य गति, पुनर्जन्म।
  5. 5कान — दिशा लोक।
  6. 6नाभि — पितृलोक।
  7. 7गुदा/अपान द्वार — निम्न गति, अधोलोक/नरक।
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आत्मा और मोक्ष

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