अमावस्या तंत्र: अंधकार=शक्ति/काली काल, चन्द्रमा शून्य=मन शून्य (गहन ध्यान), पितर/उग्र शक्ति सक्रिय, राहु=सिद्धि, दश महाविद्या। गुरु दीक्षा अनिवार्य। सामान्य=तर्पण+दान+जप।
- 1अंधकार = शक्ति काल: अमावस्या = सम्पूर्ण अंधकार। तंत्र में अंधकार = शक्ति/काली का काल। काली = अंधकार की देवी = अमावस्या पर सर्वाधिक सक्रिय।
- 2चन्द्रमा अनुपस्थित = मन शांत: तंत्र: चन्द्रमा = मन = विक्षेप। अमावस्या = चन्द्रमा शून्य = मन शून्य = गहन ध्यान सम्भव = तांत्रिक साधना प्रभावी।
- 3पितर + उग्र शक्ति: अमावस्या = पितर/उग्र शक्तियों का काल। तांत्रिक साधना = इन शक्तियों से सम्पर्क/नियंत्रण।
- 4राहु-केतु प्रभाव: अमावस्या = राहु सक्रिय। तंत्र में राहु = सिद्धि प्रदायक (उचित साधना)।
- 5दश महाविद्या: काली, तारा, धूमावती = अमावस्या विशेष। मंत्र सिद्धि शीघ्र।