भक्ति मार्ग: ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण। गीता 9.22 — अनन्य भक्त का योगक्षेम भगवान वहन करते हैं। नवधा भक्ति: श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य, आत्मनिवेदन। सबसे सरल मार्ग — जाति/लिंग/वर्ण का भेद नहीं।
- 1गीता 9.22 — 'अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्।।' — जो अनन्य भाव से मेरा चिंतन करते हैं, उनके योगक्षेम का भार मैं वहन करता हूं।
- 2गीता 12.6-7 — जो सब कर्म मुझमें अर्पित करके मत्पर हैं, उनका मैं शीघ्र संसार सागर से उद्धार करता हूं।
- 3गीता 18.66 — 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' — सब छोड़कर मेरी शरण आओ।
- 4श्रवण — भगवान की कथा सुनना (उदाहरण: राजा परीक्षित)
- 5कीर्तन — भगवान के नाम/गुण का गान (उदाहरण: शुकदेव)
- 6स्मरण — निरंतर भगवान का स्मरण (उदाहरण: प्रह्लाद)
- 7पादसेवन — भगवान के चरणों की सेवा (उदाहरण: लक्ष्मी)