का सरल उत्तर
भक्ति मार्ग: ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण। गीता 9.22 — अनन्य भक्त का योगक्षेम भगवान वहन करते हैं। नवधा भक्ति: श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य, आत्मनिवेदन। सबसे सरल मार्ग — जाति/लिंग/वर्ण का भेद नहीं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।