ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (10/129) के अनुसार सृष्टि से पहले न सत था, न असत — एकमात्र परम सत्ता थी जिसकी 'काम' (संकल्प) से सृष्टि हुई। पुराणों में भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा प्रकट होकर सृष्टि के रचयिता बने। वेदांत के अनुसार ब्रह्म की माया-शक्ति से यह सृष्टि प्रकट हुई।
1न सत था, न असत
2
न वायु था, न आकाश
3न मृत्यु थी, न अमरता
4न दिन था, न रात
5प्रारंभ में एकार्णव (विशाल जल) था
6भगवान विष्णु योगनिद्रा में शेषनाग पर विराजमान थे
7उनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ, जिस पर ब्रह्मा प्रकट हुए
8ब्रह्मा ने विष्णु की आज्ञा से पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और जीवों की रचना की
9नित्य प्रलय (प्रतिदिन मृत्यु)
10नैमित्तिक प्रलय (ब्रह्मा का एक दिन = 1000 महायुग)
11प्राकृत प्रलय (ब्रह्मा की आयु के बाद)
12आत्यंतिक प्रलय (मोक्ष — जीव का संसार से अंतिम मुक्ति)