विस्तृत उत्तर
## ब्रह्मांड की उत्पत्ति — हिंदू दर्शन के अनुसार
हिंदू धर्म में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के विषय में अनेक दार्शनिक और पौराणिक दृष्टिकोण हैं:
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### 1. ऋग्वेद — नासदीय सूक्त (10/129)
सृष्टि-उत्पत्ति का सर्वप्राचीन वर्णन। इसके ऋषि प्रजापति परमेष्ठी हैं।
इस सूक्त के अनुसार सृष्टि से पहले:
- ▸न सत था, न असत
- ▸न वायु था, न आकाश
- ▸न मृत्यु थी, न अमरता
- ▸न दिन था, न रात
> 'नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं...'
> — उस समय केवल वही एक था जो वायुरहित स्थिति में भी अपनी शक्ति से विद्यमान था।
फिर उस एकमात्र परम सत्ता की 'काम' (संकल्प) से सृष्टि का आरंभ हुआ।
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### 2. पुराणों में सृष्टि कथा (भागवत / विष्णु पुराण)
- ▸प्रारंभ में एकार्णव (विशाल जल) था
- ▸भगवान विष्णु योगनिद्रा में शेषनाग पर विराजमान थे
- ▸उनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ, जिस पर ब्रह्मा प्रकट हुए
- ▸ब्रह्मा ने विष्णु की आज्ञा से पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और जीवों की रचना की
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### 3. वेदांत दर्शन में सृष्टि
> 'यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते' (तैत्तिरीय उपनिषद)
> — जिस ब्रह्म से सब उत्पन्न होते हैं, जिसमें जीते हैं, जिसमें विलीन होते हैं — वह ब्रह्म है।
माया की शक्ति से ब्रह्म ने इस सृष्टि को प्रकट किया।
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### 4. सांख्य दर्शन के अनुसार
प्रकृति और पुरुष — ये दो नित्य तत्व हैं। प्रकृति के तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस) के संयोग से सृष्टि का विकास हुआ।
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### 5. सृष्टि का चक्र
हिंदू दर्शन में सृष्टि अनादि और सनातन है। यह चार प्रलयों का चक्र है:
- ▸नित्य प्रलय (प्रतिदिन मृत्यु)
- ▸नैमित्तिक प्रलय (ब्रह्मा का एक दिन = 1000 महायुग)
- ▸प्राकृत प्रलय (ब्रह्मा की आयु के बाद)
- ▸आत्यंतिक प्रलय (मोक्ष — जीव का संसार से अंतिम मुक्ति)





