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सृष्टि विज्ञान📜 ऋग्वेद 10/129 (नासदीय सूक्त), भागवत पुराण, वेदांत दर्शन, शिव पुराण2 मिनट पठन

ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ?

संक्षिप्त उत्तर

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (10/129) के अनुसार सृष्टि से पहले न सत था, न असत — एकमात्र परम सत्ता थी जिसकी 'काम' (संकल्प) से सृष्टि हुई। पुराणों में भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा प्रकट होकर सृष्टि के रचयिता बने। वेदांत के अनुसार ब्रह्म की माया-शक्ति से यह सृष्टि प्रकट हुई।

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विस्तृत उत्तर

## ब्रह्मांड की उत्पत्ति — हिंदू दर्शन के अनुसार

हिंदू धर्म में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के विषय में अनेक दार्शनिक और पौराणिक दृष्टिकोण हैं:

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### 1. ऋग्वेद — नासदीय सूक्त (10/129)

सृष्टि-उत्पत्ति का सर्वप्राचीन वर्णन। इसके ऋषि प्रजापति परमेष्ठी हैं।

इस सूक्त के अनुसार सृष्टि से पहले:

  • न सत था, न असत
  • न वायु था, न आकाश
  • न मृत्यु थी, न अमरता
  • न दिन था, न रात

> 'नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं...'

> — उस समय केवल वही एक था जो वायुरहित स्थिति में भी अपनी शक्ति से विद्यमान था।

फिर उस एकमात्र परम सत्ता की 'काम' (संकल्प) से सृष्टि का आरंभ हुआ।

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### 2. पुराणों में सृष्टि कथा (भागवत / विष्णु पुराण)

  • प्रारंभ में एकार्णव (विशाल जल) था
  • भगवान विष्णु योगनिद्रा में शेषनाग पर विराजमान थे
  • उनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ, जिस पर ब्रह्मा प्रकट हुए
  • ब्रह्मा ने विष्णु की आज्ञा से पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और जीवों की रचना की

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### 3. वेदांत दर्शन में सृष्टि

> 'यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते' (तैत्तिरीय उपनिषद)

> — जिस ब्रह्म से सब उत्पन्न होते हैं, जिसमें जीते हैं, जिसमें विलीन होते हैं — वह ब्रह्म है।

माया की शक्ति से ब्रह्म ने इस सृष्टि को प्रकट किया।

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### 4. सांख्य दर्शन के अनुसार

प्रकृति और पुरुष — ये दो नित्य तत्व हैं। प्रकृति के तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस) के संयोग से सृष्टि का विकास हुआ।

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### 5. सृष्टि का चक्र

हिंदू दर्शन में सृष्टि अनादि और सनातन है। यह चार प्रलयों का चक्र है:

  • नित्य प्रलय (प्रतिदिन मृत्यु)
  • नैमित्तिक प्रलय (ब्रह्मा का एक दिन = 1000 महायुग)
  • प्राकृत प्रलय (ब्रह्मा की आयु के बाद)
  • आत्यंतिक प्रलय (मोक्ष — जीव का संसार से अंतिम मुक्ति)
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शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद 10/129 (नासदीय सूक्त), भागवत पुराण, वेदांत दर्शन, शिव पुराण
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