चातुर्मास नियम: सावन = साग त्याग, भाद्रपद = दही, आश्विन = दूध, कार्तिक = दाल। शुभ/मांगलिक कार्य वर्जित। भक्ति: एकादशी व्रत, गीता/विष्णु सहस्रनाम। दान अवश्य। ब्रह्मचर्य, भूमि शयन, सादा भोजन, वाणी संयम। मूल भावना: संयम + भक्ति + आत्मशुद्धि।
- 1सावन: साग/हरी पत्तेदार सब्जी का त्याग।
- 2भाद्रपद: दही का त्याग।
- 3आश्विन: दूध का त्याग।
- 4कार्तिक: दाल/द्विदल अन्न का त्याग।
- 5सम्पूर्ण चातुर्मास: गुड़, शहद, तेल, मूली, परवल, बैंगन वर्जित (कुछ परम्पराओं में)।
- 6विष्णु/शिव उपासना नित्य करें।
- 7एकादशी व्रत नियमित रखें।
- 8गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम, रामायण पाठ।
- 9मंत्र जप और अनुष्ठान।
- 10ब्रह्मचर्य पालन।
- 11भूमि शयन (कुछ परम्पराओं में)।
- 12प्रातः जल्दी उठना, रात्रि जल्दी सोना।
- 13सादा भोजन, वाणी संयम।
- 14आत्मचिन्तन और मन की शुद्धि।