चेकलिस्ट: चौदह मुखी रुद्राक्ष शिव का तीसरा नेत्र क्यों
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चौदह मुखी रुद्राक्ष शिव का तीसरा नेत्र क्यों कहलाता है?
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14 मुखी = शिव तीसरा नेत्र: शिव नेत्रों से उत्पन्न, आज्ञा चक्र जाग्रत करता है (अन्तर्दृष्टि), तीसरा नेत्र = संहार शक्ति (शत्रु-नकारात्मकता नाश), परम दुर्लभ (तीसरा नेत्र सामान्यतः बंद)। लाभ: भविष्य ज्ञान, सर्वरक्षा। 'देव मणि' कहलाता है।
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14 मुख = शिव के 14 लोक दृष्टि: शिव पुराण के अनुसार 14 मुखी रुद्राक्ष शिव के नेत्रों से सीधे उत्पन्न हुआ। शिव का तीसरा नेत्र = सर्वज्ञता, सर्वदृष्टि, भूत-भविष्य-वर्तमान का ज्ञान। 14 मुखी रुद्राक्ष धारक को यही दिव्य दृष्टि प्रदान करता है।
2आज्ञा चक्र जागृति: शिव का तीसरा नेत्र = आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य)। 14 मुखी रुद्राक्ष आज्ञा चक्र को जाग्रत करता है, जिससे अन्तर्दृष्टि (intuition), भविष्य का बोध और आत्मज्ञान प्राप्त होता है।
3संहार शक्ति: शिव का तीसरा नेत्र खुलता है तो संहार (विनाश) होता है — कामदेव दग्ध हुए। 14 मुखी रुद्राक्ष धारक के शत्रु और नकारात्मकता नष्ट होती है।
4परम दुर्लभता: जैसे शिव का तीसरा नेत्र सामान्यतः बंद रहता है (अत्यंत विशेष अवसर पर खुलता है), वैसे ही 14 मुखी रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ है — प्रकृति में बहुत कम मिलता है।