ध्यान क्या होता है और इसे कैसे करें?
की चेकलिस्ट
ध्यान वह अवस्था है जिसमें चित्त बिना भटके एक विषय पर टिका रहे (योगसूत्र 3/2)। विधि — शांत स्थान, सीधा आसन, श्वास-साधना, फिर ओम्/इष्टदेव/श्वास पर एकाग्रता। गीता (6/15) के अनुसार नियमित ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है।
- 1किसी एक विषय पर चित्त का अविच्छिन्न, एकाग्र प्रवाह ही ध्यान है।
- 2एकाग्रता में प्रयास होता है; ध्यान में प्रयास स्वयं शांत हो जाता है
- 3एकाग्रता धारणा है (योग का 6वाँ अंग); ध्यान 7वाँ अंग है
- 4ध्यान का पूर्ण रूप समाधि है (8वाँ अंग)
- 5ओम्-नाद — भीतर 'ओम्' की गूँज
- 6इष्टदेव का रूप — हृदय में श्रीकृष्ण, राम, शिव आदि का दिव्य स्वरूप
- 7श्वास — आती-जाती साँस की अनुभूति
- 8भ्रूमध्य — आँखों के बीच ज्योतिबिंदु
- 9नियमित ध्यान से परम शांति और निर्वाण की प्राप्ति होती है।
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ध्यान साधना
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