'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः' श्लोक का क्या अर्थ है?
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'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः...' का अर्थ: ध्यान का मूल = गुरु की मूर्ति; पूजा का मूल = गुरु के चरण; मंत्र का मूल = गुरु का वाक्य; मोक्ष का मूल = केवल गुरु की कृपा।
- 1ध्यान का मूल गुरु की मूर्ति है
- 2पूजा का मूल गुरु के चरण हैं
- 3मंत्र का मूल गुरु का वाक्य है
- 4और मोक्ष का मूल केवल गुरु की कृपा है।
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गुरु तत्व और गुरु कृपा
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