शरीर के प्रत्येक अंग पर देवी का रक्षा कवच। 6 दिशाओं से सुरक्षा। नकारात्मक ऊर्जा, तांत्रिक बाधा, ग्रह दोष, शत्रु, भय से मुक्ति। सप्तशती में अनिवार्य। स्वतंत्र दैनिक पाठ भी शुभ।
- 1शारीरिक: मस्तक = चंडिका, ललाट = शूलधारिणी, नेत्र = खड्गिनी... प्रत्येक अंग पर देवी का एक रूप रक्षा करता है।
- 2सर्वदिक्: पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण + ऊर्ध्व-अधो — छह दिशाओं से सुरक्षा।
- 3नकारात्मक ऊर्जा: तांत्रिक प्रयोग, बुरी नजर, भूत-प्रेत बाधा से रक्षा।
- 4ग्रह दोष: राहु-केतु-शनि आदि अशुभ प्रभाव से।
- 5शत्रु: षड्यंत्र, कानूनी विवाद, कार्यक्षेत्र बाधा।
- 6मानसिक: भय, चिंता, अवसाद से मुक्ति।