ईशान कोण में देवी प्रतिमा स्थापित करें। आचमन, संकल्प, पंचोपचार पूजन (जल, चंदन, सिंदूर, लाल फूल, भोग), नवार्ण मंत्र जप, देवी सूक्त पाठ और आरती करें। नवरात्रि में अखंड दीप और नवमी को कन्या पूजन अनिवार्य है।
- 1दुर्गा जी की प्रतिमा या चित्र (श्री दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी)
- 2लाल चुनरी
- 3सिंदूर, कुमकुम, रोली
- 4लाल गुड़हल और लाल गुलाब
- 5पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- 6धूप, अगरबत्ती
- 7घी का दीप
- 8नारियल, पान, सुपारी
- 9हलवा-पूरी-चना (भोग के लिए)
- 10कलश (नवरात्रि में)
- 11उत्तर-पूर्व दिशा में दुर्गा जी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
- 12लाल कपड़ा बिछाएं
- 13तीन बार जल लेकर आचमन करें
- 14मन में संकल्प बोलें
- 15'ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥'
- 16जल से स्नान कराएं (या स्नान का भाव)
- 17लाल चंदन का तिलक
- 18सिंदूर अर्पण
- 19लाल फूल और गुड़हल अर्पण
- 20धूप और दीप
- 21हलवा-पूरी का भोग
- 22'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' — 108 बार
- 23'या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता...' — 3 बार
- 24'जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी...'
- 25तीन बार परिक्रमा करें
- 26साष्टांग प्रणाम करें
- 27'आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्...'
- 28प्रतिदिन कलश पूजन
- 29अखंड दीप (यदि संभव हो)
- 30अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन
- 31दशमी को कलश विसर्जन