फैक्ट्री में वास्तु दोष निवारण कैसे करें
की चेकलिस्ट
फैक्ट्री वास्तु: द्वार पूर्व/उत्तर, मालिक नैऋत्य में, भारी मशीनें दक्षिण-पश्चिम में, तैयार माल वायव्य (शीघ्र बिक्री), अग्नि स्रोत आग्नेय, जल ईशान में। बिना तोड़-फोड़: स्वस्तिक, यंत्र, हवन, ईशान में जल, सफाई-व्यवस्था बनाएं।
- 1मुख्य द्वार — पूर्व या उत्तर में। माल की आवाजाही पश्चिम या दक्षिण से।
- 2मालिक/प्रबंधक का कक्ष — नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में, मुख उत्तर/पूर्व।
- 3भारी मशीनें — दक्षिण, पश्चिम या नैऋत्य में। ईशान में भारी मशीन वर्जित।
- 4कच्चा माल (Raw Material) — दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण में।
- 5तैयार माल (Finished Goods) — उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में — यह दिशा वायु/गति से जुड़ी है, माल की बिक्री/निकासी शीघ्र होती है।
- 6बॉयलर/अग्नि स्रोत — आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) में।
- 7जल स्रोत/बोरवेल — ईशान (उत्तर-पूर्व) में।
- 8ईशान कोण — खुला, स्वच्छ, हल्का।
- 9मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ, गणेश-लक्ष्मी।
- 10ईशान कोण में जल कलश/फाउंटेन।
- 11नैऋत्य में भारी सामान/मशीन रखें।
- 12कार्यालय में कुबेर यंत्र (उत्तर) और श्री यंत्र (पूजा स्थल)।
- 13वास्तु शांति हवन नियमित अंतराल पर कराएं।
- 14कारखाने में सफाई, व्यवस्था और प्रकाश पर्याप्त रखें।
- 15टूटी मशीनें, अनुपयोगी सामान हटाएं।
- 16कैंटीन आग्नेय कोण में।
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वास्तु शास्त्र
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