अथर्वशीर्ष: 'अभिषेक से वाग्मी होता है।' विधि: पंचामृत (दूध→दही→घी→शहद→शर्करा) + गंगाजल, 'ॐ गं गणपतये नमः' सहित। पश्चात: सिंदूर तिलक, दूर्वा, मोदक भोग। तुलसी वर्जित। फल: वाक्शक्ति, बुद्धि, विघ्न नाश।
- 1गणेश प्रतिमा/मूर्ति को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।
- 2ताम्बे या कांसे का पात्र (अभिषेक पात्र) नीचे रखें।
- 3दूध — 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए
- 4दही — मंत्र सहित
- 5घी — मंत्र सहित
- 6शहद — मंत्र सहित
- 7शर्करा (चीनी) — मंत्र सहित
- 8पंचामृत के बाद शुद्ध जल (गंगाजल सर्वोत्तम) से अभिषेक।
- 9गन्ने का रस, नारियल जल, पंचगव्य (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही, घी)
- 10मूर्ति को स्वच्छ वस्त्र से पोंछें।
- 11सिंदूर/कुमकुम तिलक लगाएं।
- 12दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें — गणेश को अत्यंत प्रिय।
- 13मोदक/लड्डू का भोग लगाएं।