गणेश दूर्वा: 3/5 पत्तियों वाली, हरी-ताज़ी, गाँठ सहित। 21 संख्या उत्तम। प्रातः तोड़ें, रविवार वर्जित (कुछ में)। जड़ न उखाड़ें, सूखी/पीली वर्जित। धोकर, 'ॐ गं...' बोलकर मस्तक पर। कथा: अनलासुर ताप शमन हेतु 21 दूर्वा → शीतलता।
- 13 या 5 पत्तियों वाली दूर्वा (गाँठ सहित) तोड़ें — विषम संख्या।
- 221 दूर्वा = गणेश पूजा हेतु उत्तम संख्या। 5, 7, 11 भी शुभ।
- 3जड़ सहित न उखाड़ें — केवल ऊपरी भाग तोड़ें।
- 4सूखी/पीली दूर्वा न चढ़ाएँ — हरी और ताज़ी।
- 5दूर्वा के साथ फूल न हो (बीज वाली दूर्वा कुछ परम्पराओं में वर्जित)।
- 6प्रातःकाल (सूर्योदय के बाद) तोड़ना सर्वोत्तम।
- 7चतुर्थी तिथि पर गणेश पूजा विशेष — उसी दिन ताज़ी दूर्वा।
- 8रविवार को दूर्वा न तोड़ें (कुछ परम्पराओं में)।
- 9पूजा से कुछ समय पहले तोड़ें — ताज़ी रहे।
- 10दूर्वा को जल से धोकर शुद्ध करें।
- 11गणेश जी के मस्तक/चरणों पर अर्पित।
- 12'ॐ गं गणपतये नमः' या 'दूर्वांकुरैर्यथा गणेशो दूर्वा प्रियः...' मंत्र।
- 1321 दूर्वा की माला बनाकर भी चढ़ा सकते हैं (गणेश चतुर्थी पर)।