ग्रहण बाद: तुरंत स्नान (गंगाजल+तिल+कुश) → दान (अनंतगुना फल — तिल, अन्न, वस्त्र, धातु) → गृह शुद्धि (गंगाजल छिड़काव) → पूजा → तुलसी सहित ताजा भोजन। पुराना भोजन त्यागें। सूर्य ग्रहण: ताम्बा-गेहूँ दान। चन्द्र: चाँदी-चावल।
1ग्रहण समाप्त होते ही (मोक्ष काल) तुरंत स्नान करें।
2जल में गंगाजल, तिल, और कुश मिलाकर स्नान उत्तम।
3नदी/सरोवर में स्नान सर्वश्रेष्ठ। घर पर भी कर सकते हैं।
4स्नान मंत्र: 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।'
5स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें।
6ग्रहण मोक्ष के तुरंत बाद दान करें — इस समय का दान अनंतगुना फल देता है।