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जातकर्म संस्कार कब और कैसे करें

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जातकर्म = चतुर्थ संस्कार, जन्म के तुरन्त बाद। मुख्य: शहद+घी सोने की शलाका से चटाना (मेधा-आयु-बल हेतु)। मेधा सूक्त पाठ, शिशु के कान में मंत्र, प्रथम स्तनपान। पिता मुख देखे, कुण्डली बनवाएँ। आधुनिक: चिकित्सक सलाह अनुसार शहद।

  1. 1शिशु के जन्म के तुरन्त बाद — नाभिनाल (गर्भनाल) काटने से पूर्व या तुरन्त बाद।
  2. 2आदर्श: जन्म के दिन ही।
  3. 3यदि सम्भव न हो तो 10 दिन के भीतर (सूतक काल पूर्ण होने तक)।
  4. 4सोने की शलाका (या चम्मच) से शिशु को शहद और घी (गाय का) चटाएँ।
  5. 5मंत्र: 'ॐ भूस्त्वयि दधामि, ॐ भुवस्त्वयि दधामि, ॐ स्वस्त्वयि दधामि।'
  6. 6भावना: शिशु को मेधा (बुद्धि), आयु, और बल प्रदान।
  7. 7'मेधां ते देवः सविता, मेधां देवी सरस्वती, मेधां ते अश्विनावुभौ...' — मेधा सूक्त का पाठ।
  8. 8शिशु के कान में वैदिक मंत्र पढ़ें।
  9. 9शिशु की दीर्घायु हेतु प्रार्थना।
  10. 10'ॐ सरस्वत्यै नमः' बोलकर माता शिशु को पहला स्तनपान कराए।
  11. 11पिता शिशु का मुख देखे और मंत्र पढ़े।
  12. 12नक्षत्र/जन्म कुण्डली बनवाएँ।
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