कालभैरव अष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?
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शंकराचार्य रचित। कब: कालाष्टमी (कृष्ण अष्टमी), भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष), शनिवार/मंगलवार, रात्रि। उद्देश्य: भय नाश (काल=मृत्यु भय), शत्रु नाश, समय अधिपति, काशी मोक्ष। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।
- 1कालाष्टमी (प्रत्येक कृष्ण अष्टमी): काल भैरव का विशेष दिन।
- 2भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी): वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण भैरव पर्व।
- 3शनिवार/मंगलवार: भैरव के विशेष दिन।
- 4रात्रि में: भैरव = रात्रि के देवता।
- 5भय/शत्रु समस्या में।
- 6काशी यात्रा: काशी में कालभैरव दर्शन पश्चात।
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