देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण: कलश = ब्रह्मांड (हिरण्यगर्भ) और मानव शरीर का सूक्ष्म प्रतीक। मिट्टी = पृथ्वी, जल = जल तत्व, अखंड ज्योति = अग्नि, मंत्रोच्चार = वायु, नारियल = आकाश। पंचमहाभूतों का एकत्रीकरण।
- 1मिट्टी का पात्र और जौ (सप्तधान्य): पृथ्वी तत्व — जीवन की उर्वरता, स्थिरता और सृजन का आधार।
- 2कलश में भरा पवित्र जल: जल तत्व — जीवन-शक्ति और ब्रह्मांडीय चेतना के प्रवाह का सूचक।
- 3अखण्ड ज्योति: अग्नि तत्व — ईश्वरीय ज्ञान, तेज और वैराग्य का प्रतीक।
- 4दुर्गा सप्तशती का मंत्रोच्चार: वायु तत्व — मंत्रों की ध्वनि तरंगें वायु तत्व को जाग्रत करती हैं।
- 5कलश के मुख पर नारियल: आकाश तत्व — मानव चेतना (मस्तिष्क) का प्रतीक जो असीम आकाश से जुड़ता है।