काली साधना के नियम: गुरु दीक्षा लें, भय रहित मन से साधना करें, स्नान करें, ब्रह्मचर्य पालें, गोपनीयता रखें, साधना बीच में न छोड़ें और माँ का भाव रखें। उच्च तांत्रिक साधना बिना सिद्ध गुरु के न करें।
1स्नान: साधना से पूर्व स्नान अनिवार्य है — विशेषकर रात्रि साधना से पूर्व
2ब्रह्मचर्य: साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन करें
3मन की शुद्धि: क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार और भय का त्याग करें
4भय मुक्ति: काली साधना में सर्वाधिक महत्वपूर्ण — बिना भय के साधना करें
5गुरु दीक्षा: उच्च काली साधना से पूर्व सिद्ध गुरु से दीक्षा लें
गोपनीयता: साधना की बात किसी अनाधिकारी व्यक्ति को न बताएं
8निरंतरता: एक बार साधना आरंभ करें तो नियमित रखें — बीच में न छोड़ें
9श्रद्धा: पूर्ण श्रद्धा और समर्पण भाव रखें — संदेह साधना भंग करता है
10तांत्रिक परंपरा में 'पंचमकार' (मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन) का उल्लेख है — किंतु यह केवल उच्च दीक्षित तांत्रिकों के लिए है और अत्यंत कड़े नियमों के अंतर्गत है
11सात्विक साधक के लिए: शुद्ध सात्विक आहार, लहसुन-प्याज का त्याग
12साधना दिवस: उस दिन मांसाहार से बचें
13शमशान (श्मशान) साधना — केवल सिद्ध तांत्रिकों के लिए; सामान्य जन न करें