काली-साधना के दो मार्ग: दक्षिणाचार (सामान्य — प्रतीकात्मक, सुरक्षित) और वामाचार (उन्नत — केवल दीक्षित)। विधि: अमावस्या/कालरात्रि, काले-लाल वस्त्र, 'ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके स्वाहा' (9 लाख)। भोग: लाल गुड़हल। पूर्व में महामृत्युंजय 3 माला। गुरु-दीक्षा अनिवार्य।
- 1काली तंत्र का मूल है। सभी देवियों में श्रेष्ठ। काली-साधना तंत्र में सर्वोत्तम मानी गई है।
- 2मानसिक पञ्चमकार (प्रतीकात्मक)
- 3लाल पुष्प, नारियल, खीर भोग
- 4रात्रि जप — अमावस्या/कालरात्रि
- 5सुरक्षित और गुरु-मार्गदर्शन में करणीय
- 6पञ्चमकार (पाँच 'म' — मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन)
- 7महानिर्वाण तंत्र: यह 'वीरमार्ग' है — पशु-भाव के साधकों के लिए वर्जित
- 8बिना गुरु-दीक्षा के वामाचार = स्वयं को हानि
- 9अमावस्या रात्रि (12 बजे) — सर्वोत्तम
- 10कालरात्रि (नवरात्रि की सातवीं रात्रि)
- 11दीपावली की रात्रि — महाकाली-पूजा