अम्बुबाची = कामाख्या देवी का वार्षिक रजस्वला काल (आषाढ़, 3 दिन)। कालिका पुराण: सती योनि भाग यहां गिरा। मंदिर 3 दिन बंद → चौथे दिन रक्त-वस्त्र प्रसाद। महत्व: स्त्री शक्ति सम्मान, तांत्रिक साधना का सर्वोत्तम काल, सृष्टि उर्वरता प्रतीक। कोई मूर्ति नहीं — योनि शिलाखंड पूजित।
- 1स्त्री शक्ति का सम्मान: अम्बुबाची स्त्री के मासिक धर्म को पवित्र और दैवीय मानता है — यह उस प्राचीन शाक्त परंपरा का प्रतीक है जो स्त्री की सृजन शक्ति को पूजनीय मानती है।
- 2तांत्रिक साधना: अम्बुबाची के तीन दिन तांत्रिक साधना का सर्वोत्तम काल माना गया है। देश भर से तांत्रिक, अघोरी और साधक इन दिनों कामाख्या आते हैं।
- 3अम्बुबाची वस्त्र: मंदिर खुलने पर (चौथे दिन) देवी के लाल वस्त्र (रक्त-वस्त्र) भक्तों में प्रसाद रूप में बांटे जाते हैं — इसे अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।
- 4सृष्टि उर्वरता: यह उत्सव पृथ्वी की उर्वरता और वर्षा ऋतु के आगमन से भी जुड़ा है।