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कुंभ स्नान का क्या शास्त्रीय आधार है

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कुंभ का आधार: समुद्र मंथन में अमृत कलश से 4 स्थानों पर बूँदें गिरीं — प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक। ज्योतिषीय आधार: सूर्य, चन्द्र, बृहस्पति की राशि स्थिति से समय-स्थान निर्धारित। 12 वर्ष में कुंभ, 144 वर्ष में महाकुंभ। 3 दिन स्नान = सहस्र अश्वमेध यज्ञ फल।

  1. 1प्रयागराज: बृहस्पति वृषभ राशि में, सूर्य मकर राशि में।
  2. 2हरिद्वार: बृहस्पति कुम्भ राशि में।
  3. 3उज्जैन: बृहस्पति सिंह राशि में।
  4. 4नासिक: बृहस्पति सिंह राशि में, सूर्य-चन्द्र विशेष स्थिति में।
  5. 5कुंभ मेला: प्रति 12 वर्ष में एक बार चारों स्थानों पर बारी-बारी से।
  6. 6अर्धकुंभ: 6 वर्ष में, केवल प्रयागराज और हरिद्वार में।
  7. 7पूर्णकुंभ: 12 वर्ष में, प्रयागराज में।
  8. 8महाकुंभ: 144 वर्ष (12 पूर्ण कुंभ) बाद, केवल प्रयागराज में।
  9. 9कुंभ में तीन दिन नियमपूर्वक स्नान = सहस्र अश्वमेध यज्ञों का पुण्य।
  10. 10शाही स्नान (विशेष तिथियों पर) का पुण्य अनन्त गुना अधिक।
  11. 11इस जन्म और पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति।
  12. 12पितरों की आत्मा को शान्ति।
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