तिल-गुड़ महत्व: धार्मिक — तिल = शनि प्रिय (मकर स्वामी), विष्णु वास, 6 प्रकार प्रयोग (स्नान-दान-हवन-भोजन-तर्पण-उबटन)। गुड़ = मिठास-सम्बंधों का प्रतीक। आयुर्वेदिक — तिल उष्ण (सर्दी में गर्मी), गुड़ ऊर्जा-लौह स्रोत। दान सर्वाधिक पुण्यदायी।
- 1तिल = शनि ग्रह: मकर राशि के स्वामी शनि हैं। तिल शनि को प्रिय हैं। मकर संक्रांति पर तिल दान = शनि प्रसन्नता।
- 2तिल = पवित्रता: पुराणों में तिल को अत्यंत पवित्र माना गया है। तिल में विष्णु जी का वास माना जाता है। तिल का दान, स्नान, होम, भोजन — सभी पुण्यदायी।
- 3तिल का छह प्रकार से प्रयोग: शास्त्रों में मकर संक्रांति पर तिल का छह प्रकार से प्रयोग बताया गया है — तिल स्नान, तिल उबटन, तिल हवन, तिल जल तर्पण, तिल भोजन, तिल दान।
- 4गुड़ = मधुरता: गुड़ मधुरता और सम्बंधों की मिठास का प्रतीक है। 'तिल गुड़ घ्या आणि गोड गोड बोला' (तिल-गुड़ लो और मीठा बोलो) — महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कहावत।
- 5शीत ऋतु: मकर संक्रांति शीत काल में आती है। तिल उष्ण (गर्म) प्रकृति का है — शरीर को गर्मी देता है।
- 6गुड़ = ऊर्जा: गुड़ लौह तत्व, खनिज और ऊर्जा का स्रोत। सर्दियों में शरीर को ऊष्मा और शक्ति देता है।
- 7रोग प्रतिरोधक: तिल में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-E प्रचुर। गुड़ रक्त शुद्ध करता है। दोनों मिलकर शीतकालीन रोगों से रक्षा करते हैं।