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मीराबाई ने कृष्ण भक्ति में क्या सहा

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मीरा ने कृष्ण भक्ति में सहा: ससुराल का अपमान, विष का प्याला, सांप, कांटों की शय्या, सामाजिक बहिष्कार, घर त्याग। 'मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो न कोई।' शिक्षा: सच्ची भक्ति = सब कष्ट सहन शक्ति। भक्ति में लोक-लाज गौण।

  1. 1ससुराल में अपमान — मेड़ता की राजकुमारी मीरा का विवाह मेवाड़ के राणा भोजराज से हुआ। पति की मृत्यु के बाद ससुराल (राणा विक्रमादित्य/उदयसिंह) ने उन्हें अपमानित किया।
  2. 2विष — परंपरा के अनुसार राणा ने मीरा को विष का प्याला भिजवाया — मीरा ने कृष्ण नाम लेकर पी लिया, कोई प्रभाव नहीं हुआ — ऐसी भक्ति परंपरा की मान्यता है।
  3. 3सांप — फूलों की टोकरी में सांप भिजवाया — वह शालिग्राम/माला बन गया (भक्ति परंपरा अनुसार)।
  4. 4कांटों का बिस्तर — सोने के लिए कांटों की शय्या दी गई।
  5. 5सामाजिक बहिष्कार — राजपूत कुल की मर्यादा तोड़कर सार्वजनिक रूप से कृष्ण भजन गाना, साधु-संतों के साथ उठना-बैठना — यह उस युग में अत्यंत अपमानजनक माना गया।
  6. 6घर त्याग — अंततः मीरा ने राजमहल छोड़कर वृंदावन और द्वारका में कृष्ण भक्ति में जीवन बिताया।
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