दैनिक 2-3 बार: प्रातः (सादे) → श्रृंगार (भव्य) → शयन (हल्के)। रेशम = सर्वोत्तम। रंग: विष्णु=पीला, शिव=श्वेत/भगवा, देवी=लाल। ऋतु अनुसार (ग्रीष्म=हल्के, शीत=ऊनी)। केवल दीक्षित पुजारी। पुराने वस्त्र = निर्माल्य (भक्तों को प्रसाद)। घर: साप्ताहिक/त्योहार पर।
- 1प्रातः — शुद्ध/सादे वस्त्र (स्नान के बाद)
- 2श्रृंगार — भव्य वस्त्र + आभूषण (दर्शन के लिए)
- 3शयन — हल्के/आरामदायक वस्त्र (रात्रि)
- 4रेशम (Silk) — सर्वोत्तम
- 5सूती (Cotton) — शुभ
- 6जरी, जरदोजी — अलंकरण के लिए
- 7कृत्रिम/सिंथेटिक — अनुशंसित नहीं
- 8विष्णु/कृष्ण: पीला (पीताम्बर) प्रधान
- 9शिव: श्वेत, भगवा, बाघम्बर
- 10देवी: लाल, गुलाबी, हरा
- 11गणेश: लाल, पीला
- 12हनुमान: लाल, केसरिया
- 13ग्रीष्म: हल्के, पतले, सूती वस्त्र — शीतलता
- 14शीत: ऊनी शाल, गरम वस्त्र — देवता को ठंड से बचाना
- 15वर्षा: जल-प्रतिरोधी/जल्दी सूखने वाले
- 16उत्सवों/त्योहारों पर विशेष भव्य वस्त्र
- 17जन्माष्टमी पर कृष्ण को मोर पंख + पीताम्बर
- 18शिवरात्रि पर शिव को रुद्राक्ष + भस्म
- 19नवरात्रि पर देवी को प्रतिदिन भिन्न रंग
- 20केवल दीक्षित पुजारी/अर्चक
- 21स्नान और शुद्धि के बाद ही
- 22विशिष्ट मंत्रों के साथ
- 23देवता के पुराने वस्त्र 'निर्माल्य' कहलाते हैं
- 24इन्हें भक्तों में प्रसाद रूप में वितरित (अत्यन्त शुभ)
- 25कुछ मंदिरों में जल में विसर्जन