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चेकलिस्ट

मंदिर में भगवान की मूर्ति को छूना चाहिए या नहीं?

की चेकलिस्ट

गर्भगृह: सामान्य भक्त स्पर्श वर्जित — केवल दीक्षित पुजारी। कारण: चैतन्य शक्ति, पवित्रता, क्षति-रक्षा। अनुमति: चरण स्पर्श (पुजारी द्वारा), शिवलिंग जलाभिषेक (कुछ में)। दक्षिण भारत: कड़ा। उत्तर भारत: उदार। घर: स्पर्श अनुमत (शुद्ध हाथ)। मंदिर नियम पालन करें।

  1. 1प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति = साक्षात् देवता — उसकी चैतन्य शक्ति अत्यन्त तीव्र
  2. 2अशुद्ध हाथों से स्पर्श = मूर्ति की पवित्रता प्रभावित
  3. 3बार-बार स्पर्श से मूर्ति क्षतिग्रस्त हो सकती है (विशेषतः पुरानी मूर्तियाँ)
  4. 4मंदिर की व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए
  5. 5चरण स्पर्श: कुछ मंदिरों में देवता के चरणों का स्पर्श कराया जाता है — पुजारी की अनुमति से
  6. 6उत्सव मूर्ति: कुछ दक्षिण भारतीय मंदिरों में उत्सव विग्रह (Processional Deity) के चरण स्पर्श का विधान
  7. 7शिवलिंग: कुछ मंदिरों में शिवलिंग पर स्वयं जल चढ़ाने की अनुमति (पुजारी की उपस्थिति में)
  8. 8दक्षिण भारतीय मंदिर: अत्यन्त कड़ा — गर्भगृह में प्रवेश भी वर्जित
  9. 9उत्तर भारतीय मंदिर: अपेक्षाकृत उदार — कुछ में मूर्ति स्पर्श/अभिषेक की अनुमति
  10. 10/वैष्णव: मूर्ति स्पर्श केवल पुजारी
  11. 11शिव मंदिर: शिवलिंग पर जल चढ़ाना प्रायः सबके लिए अनुमत
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मंदिर नियम

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